
भारत की रक्षा तकनीक ने एक और छलांग मारी है! DRDO ने ड्रोन से दागी जाने वाली अत्याधुनिक मिसाइल ULPGM-V3 का सफल परीक्षण कर दिखाया है कि अब दुश्मनों को छिपने की कोई जगह नहीं मिलेगी — न ज़मीन पर, न बंकर में, और न ही दिल में।
आंध्र प्रदेश के कुरनूल में हुई यह टेस्टिंग न सिर्फ़ सफल रही, बल्कि दुश्मनों को “सतर्क हो जाओ, भारत अब खुद बना रहा है बर्बादी के यंत्र” वाला संदेश भी दे गई।
एक मिसाइल, तीन तबाही: वारहेड्स की तिकड़ी
ULPGM-V3 कोई मामूली मिसाइल नहीं है। ये एक तीन इन वन टूलकिट है:
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एंटी-आर्मर वॉरहेड – टैंक फोड़ो, बख्तरबंद गाड़ी तोड़ो, और साइड में पॉपकॉर्न खाओ।
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पेनिट्रेशन-कम-ब्लास्ट वॉरहेड – बंकर क्या चीज़ है, सीधा आर-पार कर दे!
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प्री-फ्रैगमेंटेशन वॉरहेड – दुश्मन का बड़ा इलाका? अब “कवरेज” सिर्फ़ WiFi का नहीं, मिसाइल का भी है।
स्टार्टअप बना गेमचेंजर: न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज
बेंगलुरु की न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज ने इस मिसाइल को ड्रोन से दागने लायक बनाया है। यानी अब लड़ाई में भी Make in India का फ्लेवर होगा।

DRDO ने इस टेक्नोलॉजी को लंबी रेंज और लंबे समय तक उड़ने वाले ड्रोन के साथ जोड़ने की तैयारी कर ली है। मतलब, अगले लेवल की लड़ाई अब आकाश से ही लड़ी जाएगी।
भारत बोले: अब हम भी High-Tech हैं
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO और सभी कंपनियों को बधाई दी और कहा,
“अब भारत सिर्फ़ रक्षा उपकरण नहीं खरीदेगा, बनाएगा भी।”
वहीं, DRDO प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने कहा कि यह मिसाइल आज की जंगों की जरूरत है। और वाकई, जब दुश्मन बंकर में छिपे हों और मिसाइल सीधा वहाँ “नमस्ते” कहे – तो बात कुछ अलग होती है।
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